Bihar Floods

गोपालगंज, 25 जुलाई । बिहार में ऐसे तो 10 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं लेकिन गोपालगंज में तटबंध के टूटने के बाद कई प्रखंडों की हालत खराब हो गई है। बरौली प्रखंड के शहरी इलाकों के घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है जबकि छत पर आसमान से गिर रही बारिश की बूंदें छतों को ठिकाना बनाने में बाधा उत्पन्न कर रही हैं।

गोपालगंज के देवापुर में सारण तटबंध के टूट जाने के दर्जनों गांव में बाढ़ का पानी फैल गया। जिस इलाके में कभी भी बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा था, वहां भी बाढ़ का मंजर देख लोग सहम गए। घरों के कमरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया। लोगों ने जब पक्के मकानों की छत पर शरण लिए तो वहां भी बारिश की बूंदें उन्हें ठिकाना बनाने से रोकी रही। छत पर टिके लोग किसी मददगार की आस में हैं। इनके पास ना खाने को खाना है और न ही पीने को पानी।

देवापुर में नदी ने विकराल रूप दिखाया और सारण बांध को तोड़ दिया। बांध टूटने की सूचना के बाद ढढ़वा, सोनबरसा, आलापुर, जोकहा, रूपनाछाप सहित बरौली गांव के लोग तटबंध पर शरण ले लिए।

सिसई गांव के अरुण गुप्ता बताते हैं कि गांव के कई लोग तो तटबंध पहुंच गए लेकिन कई लोग घरों को छोड़कर नहीं जाना चाहते। छतों पर लोगों को ठिकाना बनाने की कोशिश की। इसके लिए छतों पर चूल्हा-बर्तन लेकर पहुंच गए, लेकिन प्रकृति की मार भारी पड़ी। मिट्टी के चूल्हे पानी में विलीन हो गए। अब तो खाने पर आफत है।

इधर, देवपुर के गांव के लेाग अभी भी छतों पर शरण लिए हुए हैं। देवपुर के संग्राम सिंह कहते हैं कि छत पर शरण लिए हुए हैं लेकिन पानी के बीच में रहने के बावजूद पीने को पानी नहीं। सुबह में परेशानी और बढ़ गई जब बाथरूम के लिए भी स्थान नहीं मिल रहा। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को कई लोग बाढ़ के पानी में रस्सी के सहारे बाहर निकल सके थे। जो निकल गए, सो निकल गए, इसके बाद देखने वाला कोई नहीं।

बरौली के लोग कहते हैं कि उनका तो सबकुछ बर्बाद हो गया। उन्हें अब भविष्य को लेकर चिंता है। बरौली के नागेश्वर कहते हैं कि बाढ़ का पानी तो आज नहीं तो कल उतर जाएगा, लेकिन उनके दुकान में रखे सभी सामान बाढ़ के पानी में बर्बाद हो गए, उनका क्या होगा। उनकी आगे की जिंदगी कैसे कटेगी।

उल्लेखनीय है कि बिहार में सभी नदियां उफान पर हैं और 10 जिलों के 74 प्रखंडों के 529 पंचायत के नौ लाख से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकार राहत और बचाव कार्य चला रही है लेकिन लोगों की शिकायत है कि राहत सभी पीड़ितों तक पहुंच नहीं रही है।

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