raksha bandhan rakhi

नई दिल्ली, 2 अगस्त । भाई-बहन के स्नेह और पवित्र रिश्ते का त्योहार रक्षाबंधन से पहले इस साल देश का बाजार कोरोना के कारण पहले की तरह सज नहीं पाया, लेकिन बहनों-भाइयों के उत्साह में कमी नहीं है। रक्षाबंधन सोमवार को है और इसके लिए बहनों ने पूरी तैयारी कर ली है, मगर आने-जाने और भीड़भाड़ से बचने को लेकर काफी एहितयात बरत रही हैं।

बाजार की भीड़भाड़ से बचने के लिए इस बार राखियों की ऑनलाइन खरीद को ज्यादा तवज्जो दिया गया है। रक्षाबंधन पर घरों में भी सगे-संबंधियों व परिवार के लोगों का जमावड़ा करने और पार्टी से लोग अलग रह रहे हैं।

दिल्ली के यमुना विहार की नीतू गुप्ता ने अपने बच्चों को पहले ही बता दिया है कि वह इस बार रक्षाबंधन पर उन्हें मामा के घर नहीं ले जाएंगी, बल्कि अकेली जाएंगी।

गुप्ता ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार और विश्वास का त्योहार है, इसलिए भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिए वह हर हाल में जाएंगी, लेकिन वहां ज्यादा देर ठहरेंगी नहीं और न ही ज्यादा लोगों से मिलेंगी।

सीआर पार्क की अंशु भी पूर्वी दिल्ली में रहने वाले अपने भाई को राखी बांधने के लिए अकेली ही जाएंगी। नीतू और अंशु की तरह अनेक बहनें अपने भाइयों को राखी बांधने उनके घरे अवश्य जाएंगी, लेकिन कोरोनासंक्रमण को लेकर वे किसी भी पार्टी में शामिल नहीं होंगी और न ही बच्चों को साथ लेकर जाएंगी।

अनेक बहनों ने पहले ही कूरियर व डाकसेवा के माध्यम से पहले ही भाइयों को राखियां दे दी हैं। कूरियर और डाकसेवा के जरिए बहनें देश-विदेश में राखियां हर साल भेजती थीं, लेकिन इस साल उसमें भी एहतियात बरती गई। मसलन, राखी के साथ चावल और रोली व गिफ्ट के पैकेट न भेजकर ज्यादातर बहनों ने बस स्नेह के धागे यानी राखियां भेजना ही उचित समझा।

यह सब एहतियात कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर बरती जा रही है। कोरोना ने रक्षाबंधन के पवित्र त्योहार पर भाई-बहनों के प्यार और उत्साह में कमी तो नहीं कर पाया, लेकिन बाजार पर इसका असर जरूर पड़ा है। बाजारवाद के मौजूदा दौर में रक्षाबंधन पर महंगे उपहार और महंगी व आकर्षक राखियों की खरीदारी से बाजार को इस त्योहार से काफी उम्मीदें रहती हैं।

कारोबारी बताते हैं कि दरअसल त्योहारी सीजन की शुरुआत ही रक्षाबंधन से होती है और त्योहारी खरीदारी का यह सीजन दिवाली के बाद क्रिसमस तक चलता है। मगर, इस बार कोरोना के साये के चलते सीजन की शुरुआत यानी रक्षाबंधन पर बाजार से रौनक गायब है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *