Gurmeet Ram Rahim

साध्वियों के बलात्कार के आरोप में हरियाणा के रोहतक की सुनारिया जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा के बलात्कारी बाबा राम रहीम को तीन साल के बाद पहली बार एक दिन की पैरोल पर छोड़ा गया।

24 अक्टूबर को गोपनीय ढंग से रामरहीम को जेल से बाहर पेरोल पर एक दिन के लिए गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में उसकी मां से मिलाने के लिए ले जाया गया। इस अस्पताल में राम रहीम की मां नसीब कौर इलाज के लिए भर्ती हैं और उनकी तबीयत काफी खराब है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक राम रहीम का पेरोल बीजेपी के एक बड़े केंद्रीय नेता के हस्तक्षेप के बाद दी गई है। इस बारे में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, डीजीपी मनोज यादव समेत गृह विभाग के आला अधिकारियों को भी जानकारी थी जिसे बेहद गोपनीय रखा गया।

इस बारे में टाइम्स ऑफ इंडिया में शनिवार को छपी एक खबर मुताबिक रोहतक से सुनारिया के बीच राम रहीम की सुरक्षा के लिए हरियाणा पुलिस की तीन कंपनियां तैनात की गई जिसमें 300 से अधिक जवान शामिल थे। राम रहीम को पुलिस की बखत्तरबंद गाड़ी में सुनारिया से गुड़गांव ले जाया गया और गुड़गांव में जिस अस्पताल में उसकी मां भर्ती हैं उस अस्पताल का पूरा फ्लोर खाली करा दिया गया था। अस्पताल के बेसमेंट में पुलिस की 50 से अधिक गाड़ियां करीब आधे दिन तक पार्क रही। गुड़गांव के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उनसे रोहतक पुलिस ने अस्पताल के चारों और सुरक्षा बल तैनात करने को कहा गया था।

तीन साल में चार बार रद्द की गई राम रहीम की पेरोल

24 अक्टूबर को पहली बार राम रहीम को एक िदन की पेराेल से पहले चार बार पहले भी राम रहीम और उसके परिवार ने पेराेल की अर्जी सुनारिया जेल प्रशासन और पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट को दािखल की थी जिसे खारिज कर दिया गया। 25 अगस्त 2017 को सीबीआई की पंचकूला कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने राम रहीम को दो साध्वियों के बलात्कार के आरोप में 20-20 साल कैद और 2002 में सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के आरोप में 17 जनवरी 2019 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

कड़ी सजा काट रहे बलात्कारी बाबा ने पहली बार अप्रैल 2019 में दत्तक बेटी गुरांश इंसा की शादी में शामिल होने के लिए पैराेल की अर्जी लगाई थी जिसे सीबीआई के कड़े विरोध के चलते ठुकरा दिया गया। इसके बाद मई 2019 में फिर से गुरांश इंसा द्वारा अपनी शादी में बाबा को शामिल करने के लिए चार हफ्ते के पेरोल की अर्जी पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट ने ठुकरा दी थी। जून 2019 में रामरहीम ने अपने खेतों में काम करने को 42 दिन के पेराेल की अर्जी लगाई जो बाद मंे उसके द्वारा वापस ले ली गई।

अप्रैल 2020 में फिर से राम रहीम ने अपनी मां से मिलने के लिए पेरोल की अर्जी लगाई जो सिरसा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दी गई। सिरसा पुलिस ने रिपोर्ट दी थी कि राम रहीम को पेराेल पर छोड़े जाने से प्रदेश में फिर से दंगे भड़क सकते हैं।

राम रहीम को अगस्त 2017 में जेल की सजा के दौरान भड़के दंगों में भी 40 से अधिक लोग पचंकूला की सड़कों पर मारे गए थे। हरियाणा व पंजाब में एक महीने तक अंशांति का मौहाल बना रहा। गुरमीत को एक दिन के पेरोल दिए जाने के सवाल पर हरियाणा के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि बीमार को मिलने जाने देने के लिए पेरोल मंजूर की गई। एक कड़ी से कड़ी सजा पाने वाले मुलाजिम काे भी कानूनन पेराेल का अधिकार है इसलिए पेरोल दी गई। अधिकारी ने पुष्टि की कि भाजपा के एक बड़े नेता की सिफारिश के बाद ही राज्य सरकार राम रहीम को पेरोल के लिए राजी हुई।

उल्लेखनीय है कि 2014 के विधानसभा चुनाव मंे भाजपा की पहली बार अपने दम पर राज्य में सरकार बनने के पीछे भी राम रहीम के डेरे सच्चा सौदा का बड़ा हाथ रहा है। राम रहीम के आर्शिवाद के िलए भाजपा के बड़े नेता िसरसा स्थित डेरा सच्चा सोदा चुनाव से पहले और सरकार बनने के बाद भी गए।

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