Election Voting Day

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने कहा कि पंचायत चुनाव में सरकारी मशीनरी के भारी दुरुपयोग और धनबल के अनुचित इस्तेमाल के बावजूद बसपा ने जैसा प्रदर्शन किया है वो जोश भरने व हौंसले बुलंद करने वाला है। कहा कि यह परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों के लिए लोगों में नई ऊर्जा जोश भरने वाला है।

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में बसपा के हर क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन से पार्टी की मुखिया मायावती बेहद खुश हैं। बहुजन समाज पार्टी ने गुरुवार को इस बाबत एक प्रेस नोट भी जारी किया है। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव में बसपा का प्रदर्शन विशेषकर कुछ बड़े जिलों को छोड़कर अधिकांश जिलों में काफी अच्छा रहा। मथुरा, आगरा, मेरठ, बुलंदाशहर, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुरादाबाद, हापुड़, शाहजहांपुर, कानपुर देहात, जालौन, बांदा, चित्रकूट, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सुल्तानपुर, बलरामपुर, संत कबीर नगर, महाराजगंज, आजमगढ़, मऊ, प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर, चंदौली जिले में पार्टी का प्रदर्शन बेहतरीन रहा। बसपा मुखिया मायावती ने कहा कि यह परिणाम आगामी विधानसभा चुनावों के लिए लोगों में नई ऊर्जा जोश भरने व हौसले बुलंद करने वाला है। हमारी पार्टी के प्रत्याशियों के साथ ही कार्यकर्ता तथा नेता इस परिणाम को पाकर बेहद उत्साहित हैं।

मायावती ने उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव में प्रदेश के 75 जिलों में से बसपा के 25 में शानदार प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त की है। बसपा के इस प्रदर्शन से उत्साहित मायावती ने कहा कि पार्टी के समर्थित प्रत्याशियों ने 25 जिलों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि हम प्रदेश की जनता का तहे दिल से आभार प्रकट करते हैं। हमारी पार्टी के हर स्तर के सभी छोटे व बड़े कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई। उन्होंने कहा कि जितने भी निर्दलीय उम्मीदवार कामयाब हुए हैं, उनमें से ज्यादातर वास्तव में बसपा से ही जुड़े हुए लोग हैं। इसमें भी खासकर आरक्षित सीटों पर आम सहमति नहीं बन पाने पर इन सभी ने अपने-अपने बूते पर ही चुनाव लड़कर जीत हासिल की है। जिन जिलों में बीएसपी समर्थित उम्मीदवार के लिए आम सहमति बन गई, वहां अच्छा रिजल्ट आया।

मायावती ने कहा कि कई जिलों में आम सहमति नहीं बनने के कारण कई सीट पर कई लोग बसपा का झंडा बैनर आदि लेकर चुनाव लड़ते रहे। सामान्य सीटों पर तो पार्टी को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन सुरक्षित सीटों पर पार्टी के कई उम्मीदवार खड़े होने की वजह से ऐसा नहीं हो सका। इसका ज्यादातर लाभ विरोधी पार्टियों को पहुंच गया, इससे काफी कुछ सबक सीख कर अब पार्टी के लोग खुद ही आगे की ऐसी गलती नहीं करेंगे। कहा कि अगर चुनाव में सब कुछ स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से होता तो बीएसपी के कई उम्मीदवार एक सीट पर खड़े नहीं होते तो निश्चित ही बीएसपी का प्रदर्शन और भी ज्यादा बेहतर हो सकता था।

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